खट्टी मिट्ठी शिकायतें
हम सब के पास बहुत सारी बातें और किस्से कहने और सुनने के लिए होते हैं उनमे से कुछ बातें अपने परिणाम तक पहुँच जाते है और कुछ बातें अधूरी रहकर किस्से या शिकायतों का रूप लेती है| मेरे पहले लेख में एक बहुत छोटी पर बहुत महतवपूर्ण बात की शिकायत , में उन सबसे करती हूँ जिनके लिए जिंदगी में कुछ खाश लोगों की इम्पोर्टेंस तब ख़तम हो जाती है जब वो कुछ बन कर आगे अपनी लाइफ में बढ़ जाते है |
आज बच्चों युवाओं और बुजुर्गों के लय ताल बिगड़े हुए है युवा और बच्चे है अपने में मग्न और बुजुर्ग उन्हें आउटडेटिड लग रहे है | नहीं उन्हें पता कि बुजुर्ग जला सकते है वह मशाल जिसकी रौशनी में समाज तरक्की कर सकता है | बुजुर्गों के ज्ञान और अनुभव से ही हमारा देश आगे बढ़ सकता है |
हम अगर बहुत दूर न जा कर सिर्फ अपनी जिंदगी में रहने वाले उन खाश बुजुर्गों का महत्त्व अपनी जिंदगी में भी देख सकते है | उनके खट्टे-मीठे , छोटी-बड़ी बातें और अनुभवों पर हमें सही रास्ता दिखने की कोशिश से हमारे जीवन और उसमे आने वाली बड़ी बड़ी से मुसीबत समझदारी से हल हो जाती है | बुजुर्ग संस्कारों वृक्ष है अनुभव और ज्ञान में दक्ष है उनकी छाया में हम पाएंगे अनमोल खजाना भूल कर भी अपने बड़ों से कभी दूर ना जाना |
हम हमेशा क्या प्यार स्नेह पा कर बहुत खुश होते है पर अगर उन्हें हमसे कुछ ऐसा कहा जो हमारे हित में नहीं होता है फिर हम क्यों इतना नाराज हो कर दूर जाने लगते हैं | हम ये भूल जाते है जितना उन्हें हमसे प्यार करने का हक़ है उतना ही उन्हें गुस्सा करने और डांटने का हक़ भी है | बुजुर्ग हमारे मार्ग दर्शक है वे ही हमारे सच्चे पथ प्रदर्शक है उसने मिली दिशा हमारा भाग्य बदल सकती है , बुजुर्गों की सीख हमारा जीवन खुशियों से भर सकती है | हमारा कर्तव्य है बुजुर्गों को दे भावान्ताम्क सुरक्षा और सम्मान, उन्हें जोड़े समाज की मुख्य धारा से और ना करें उनकी उपेक्षा व अपमान |
आज जब हम उन तमाम बच्चों को देखतें है जिन्हें बस जिंदगी में चल रहे उतार चढ़ाव से मतलब होता है | मेरी शिकायत उन सबसे है , आप जितना समय व्हाट्स एप ,फेसबुक पर दोस्तों के साथ घुमने में जितना वक्त देते है बस उस वक़्त में थोडा वक्त खाश और अहम् लोगों के सात व्यतीत करें उन्हें खुश कर के उनके चेहरे पर मुस्कराहट लाएं | हमारा अस्तित्व है हमारे बड़ों से ही , तो उनको प्यार सुरक्षा सम्मान दे कर हम कर रहे है केवल खुद पर एहसान |
मेरा यह लेख मेरी नानी माँ के लिए है उनकी डांट सुन कर जीवन में आए सुधार और उनके प्यार से एक एक अच्छे इंसान बनने की प्रेरणा मिली है | उनको खुश रखना अब मेरी ड्यूटी और जिम्मेदारी है | पर उनके साथी उम्र वाले बुजुर्ग है जिनसे मैं मिली और उनके किस्से सुन कर आँखें भर जाती है की कोई बच्चा उन माँ बाप दादा दादी के साथ इतना गलत व्यवहार भी कर सकता है वो सब हमरी तरह ह्रष्ट-पुष्ट भागने वाले नहीं है पर उनका दिल और दिमाग उतना ही जवां है |
Excellent effort
ReplyDeleteMudda acha hai
ReplyDeleteGood
फेसबुक पर हजारो दोस्त हैं , मगर घर मे किसी से बात नहीं होती । मेरा मानना है कि सोशल साइट्स ने बहुत प्रभाव डाला है हमारे दैनिक रिश्तों पर ।
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